Skip to main content

गले में खराश,कारण,लक्षण,उपचार (sore throat )

गले में खराश अक्सर मौसम के बदलने से होता है,जो अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ख़त्म हो जाती है। अगर आपको गले में खराश के साथ सर्दी बुखार और साँस लेने में तकलीफ हो तो आप तुरंत आपको कोरोना का टेस्ट करवा लेना चाहिए ,क्युकी इस कोरोना के माहौल में हमें सतर्क रहना भी जरुरी है। 

अगर आप को ये लक्षण नहीं है और सिर्फ आम गले की खरश है तो आपको टेंशन लेने की जरुरत नहीं है आप इन्हे  कुछ घरेलु नुस्खों की मदद से भी ठीक कर सकते है।

गले की खराश 

गले की खराश (sore throat) क्या है ?

गले में खराश के लक्षण :

गले की खराश (sore throat) क्या है ?

जब हमें हमारे गले में कुछ खाते समय ,पानी पिते समय होने वाले दर्द या खासी के साथ गले में  अजीब सा लगने को ही हम गले की खराश कहते है। 
गले का खराश आमतौर पर गर्म पानी से गरारे करने से या गर्म पानी  से खतम की जा सकती है। लेकिन बहुत से लोगो को ये करने के बाद भी दर्द बना  रहता है ,ऐसे में हम कुछ घरेलु नुस्खों का इस्तेमाल करके हम इससे बिलकुल आराम पा सकते है। 

style="text-align: left;"> गले में खराश के लक्षण :

गले में खराश होने पर हम कुछ इन लक्षण के कारण भी इन्हे पहचान सकते है 
  • गले में खिचाव होना 
  • गले में जलन होना 
  • गले में अंदरूनी हिस्सों में लाल हो जाना या इन्फेक्शन होना 
  • गले में सूजन होना 
  • गले में हलकी खासी आना 

गले में खराश  के कारण

गले में खराश होने के बहुत से कारण हो सकते है। हम इन कारणों को समझते है 
  • मौसम के बदलाव् होने पर अक्सर गले की खराश देखा जाता है लेकिन इस तरह की खराश कुछ समय के अपने आप ही चलि जाती है। 
  • फ्लू होने पर भी अक्सर गले में खरश हो जाती है 
  • एलर्जी होने पर 
  • इन्फेक्शन होने पर गले  में खराश हो जाती है ऐसे में हमारे गले में लाल लाल हलकी फुंसिया मुँह के अंदर दिखने लगती है और ऐसे में हमारे द्वारा पानी पिने या कुछ खाने पर भी गले में दर्द या जलन होती है। 

गले में खराश होने पर करे ये उपाय 

गले में खराश होंने पर हम इन्हे हमारे घर में मौजूद घरेलु उत्पादनो से भी ऐसे सहीं कर सकते है 

  • गरारे करने पर ,हम ऐसे में नमक के साथ गरम पानी से गरारे करना चाहिए 
  • सिकाई करने से ,इसमें  हमें गले की सिकाई करना चहिये
  • गर्म पानी पिने से भी हमें गले की खराश होने पर काफी आराम मिलता है 
  • गले की खराश को हम हरबल टी या आयुर्वेदिक चाय से भी सही कर सकते है इसमें हमें अदरक ,लौंग ,काली मिर्च ,और तुलसी मिलकर चाय बनाकर पिने से काफी आराम मिलता है। 
  • दूध में हल्दी डालकर पिने से गले की खराश बिलकुल सही की जा  सकती है। 
  • लहसुन की कली को पीसकर खाने से 
  • मुलेठी का टुकड़ा चूसने से गले की खराश सही की जा सकती है। 
  • काली मिर्च का सेवन करने से भी आराम मिलता है 
नोट : ये लेख सिर्फ आपको जानकारी बढ़ाने के माध्यम से बनाया गया है अगर ज्यादा तकलीफ होने पर अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श ले। 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

कब्ज (constipation )

हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे कब्ज के बारे में, ये एक बहुत ही बड़ी समस्या बन सकती है अगर इसका सही से इलाज नहीं किया जाएगा। कब्ज या कब्ज मतलब मल का शरीर से निकलने में परेशानी या रुक रुक कर आना। इसको हम अच्छे से समझेंगे।    sore throat ke liye yaha click kare gale me kharash ke liye yaha click kare कब्ज (constipation) क्या है: कब्ज आंतो के परिवर्तन की वह स्तिथि जिसमें शरीर से मल का त्याग सामान्य से कम हो जाता है। कब्ज के समय हम जो भी भोजन करते हैं उसकी पाचन सही से नहीं हो पाता है और इस कारण से मल को त्यागने में समस्या उत्पन्न होती है।] कब्ज या कब्ज के समय मल कड़ा हो जाता है जिस कारण से इसे त्यागने में बहुत ताकत या जोर लगाना पड़ता है। ऐसा करने से हमारे पेट में दर्द होता है और कब्ज के समय हमें उलटी या जी मचलाने लगता है।  आयुर्वेद के अनुसार, शरीर का संतुलन  वात, पित्त, कफ  दोषों पर निर्भर करता है। इनमें हुई असंतुलन के कारण शरीर रोगों से घिर जाता है। खान-पान और जीवनशैली में लापरवाही के कारण जब जठराग्नि मन्द हो जाती है, और आहार सही समय पर ठीक प्रकार से नहीं पचता है। ...

मेडिटेशन केसे करते है meditation kese karte hai

मेडिटेशन या ध्यान केसे करते है meditation kese kare मेडिटेशन वो क्रिया है जिसके द्वारा हम अपने मन के विचारो और भावो को खतम करके एक ऐसी मुद्रा या स्तिथि में पहुंच जाते है जहां संसार के समस्त विचारो से परे हो जाना और ज्ञान के सागर में डूब जाना ,कहा कोई भी परेशानी ओर दुख या किसी तनाव ना रहे ।इसमें हम अपनी इन्द्रियों को काबू करना सीखते है जिससे हम उसे फालतू चीज़ों में भटकने से रोक कर अपने जीवन में सकारात्मक विचारों को उत्पन्न कर सके और नकारात्मक भाव को खत्म कर सके। अब मेडिटेशन को करने के लिए हमें सुबह का समय चुनना चाहिए क्युकी सुबह के समय हमारे आसपास का वातावण शुद्ध होता है और शांतीपूर्ण वातावरण होता है जिससे हमें ध्यान लगाने में मदद मिलती है।सुबह के समय हमें वायु भी शुद्ध मिलती है। दूसरी बात हमें ध्यान के लिए स्थान का चयन बहुत अच्छे से करना है जहां भीड़ भाड ना हो।हमें एक शांत वातावरण वाला स्थान को चुनना है। तीसरी और महत्पूर्ण बात हमें ध्यान लगाते समय केसे बैठना या केसे ध्यान लगाना है।ये बाते हम ध्यान के प्रकार में अच्छे से समझेंगे। मेडिटेशन के बहुत से प्रकार होते है लेकिन सभी का सिर्फ एक ...